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भारत हमेशा से विवधताओं और अविश्वसनीय सुंदरता का देश रहा है. इस फेहरिस्त में शामिल 28 तस्वीरों को 1900-1908 के दौरान लिया गया है, जो सिर्फ़ तस्वीरें ही नहीं, बल्कि भारत के इतिहास का जीता-जागता सबूत हैं. इन तस्वीरों में भारत का वो दौर साफ़ झलकता है जब भारत एक गुलाम देश होने के साथ-साथ परंपराओं और संस्कृति में जीता था. खैर, आज भारत विकास की राह पर दौड़ रहा. समस्याएं भले ही हों, लेकिन भारत विश्वभर में अपना नाम रौशन कर रहा है. तो देखिए भारत के राज्यों में मौजूद कुछ जगहों की अतुल्य तस्वीरें, जो आपके न्यू ईयर को यादगार बना देगीं!

1. 50 फुट ऊंचे टॉवर से टैंक में छलांग लगाता व्यक्ति- फतेहपुर सीकरी 

2. कश्मीर के महाराजा की नाव – श्रीनगर 

3. बैल गाड़ी पर बैठा व्यक्ति- कलकत्ता 

4. चट्टानें काट कर बनाया गया मंदिर- एलिफेन्टा 

5. अपने छात्रों के साथ पारसी हैडमास्टर- उरण, नवी मुंबई 

6. स्वर्ण मंदिर- अमृतसर 

7. महापालिका मार्ग- मुंबई 

8. कोलोनेड में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर- माउंट आबू 

9. नालदेहरा- शिमला 

10. बैलों की त्वाचा में हवा भरकर उसे नाव का रूप देते लोग- सतलुज का तट 

11. अकबर का मकबरा, सिकंदरा- आगरा 

12. स्तभों का मंदिर- मदुरै 

13. गंगा का एक तट- वाराणसी 

14. शवयात्रा- आगरा

15. दिलवाड़ा मंदिर के आस-पास मौजूद हरियाली- माउंट आबू 

16. चरवाहों का एक झुंड- माउंट आबू 

17. स्वर्ण मंदिर में मौजूद स्कूली छात्र- अमृतसर 

18. दूल्हा और दुल्हन- मुंबई 

19. यमुना में दिखाई देता ताजमहल का प्रतिबिंब- आगरा 

20. तमाशा देखती भीड़- जयपुर 

21. जमा मस्जिद- दिल्ली 

22. दिलवाड़ा मंदिर में प्रार्थना करते भक्त- माउंड आबू 

23. सिकंदरा में मौजूद अकबर के मकबरे का मुख्य द्वार- आगरा 

24. तालाब में स्थित मंदिर- वाराणसी 

25. मानसिंह का पैलेस- ग्वालियर 

26. झेलम पार करने का रास्ता- कश्मीर 

27. तेज़ धूप में ध्यानमग्न योगी- माउंट आबू 

28. व्यस्त सड़क पर मौजूद दुकानें- दिल्ली 

आप यह तथ्य जानते ही होंगे की सुंदर कैलाश पर्वत, जो तिब्बत मे है, वहाँ कोई पर्वतारोही आज तक चढ़ाई नहीं कर पाया | यह सिर्फ़ कहानियों मे सुना गया है की रहस्यमई तिब्बतिअन योद्धा और कवि “मिलरेपा” एकलौते ऐसे इंसान हैं जिन्होने कैलाश पर्वत की चोटी पर विजय प्राप्त की है | क्या आपने कभी सोचा है कि इस पर्वत की चढ़ाई इतनी दुर्गम क्यों है ? क्या है यह शारीरिक दुर्बलता है या इस पर्वत की ऊंचाई है या ऐसा कोई रहस्य जिसको इंसान समझ नहीं सकता | नीचे कुछ तथ्य दिए हैं जिनके द्वारा इस रहस्य को समझाने की कोशिश की गयी है |
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माउंट एवरेस्ट जो की 8848 मीटर की ऊंचाई पर है उसकी चोटी तक 4000 लोग पहुँच चुके हैं जबकि कैलाश की 6638 मीटर की उँचाई आज तक कोई तय नहीं कर पाया | हिंदू जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के अनुसार कैलाश एक बहुत पवित्र जगह है | यह मान्यता है की कैलाश पर्वत भगवान शिव का स्थान है इसीलिए कोई जीवित व्यक्ति वहाँ पहुँच नहीं सकता | प्राचीन तिब्बती कहानियों के अनुसार भी ऐसे स्थान पर जहाँ बादलों के बीच भगवान का निवास है, वहाँ किसी इंसान का जाना असंभव है |

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मानसरोवर और रक्षताल झील
मानसरोवर झील और रक्षताल झील कैलाश पर्वत की घाटी मे स्थित हैं जिनकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 14950 फीट है | मानसरोवर झील दुनिया की सबसे ऊंची साफ पानी की झील है जबकि रक्षताल एक खारे पानी की झील है | मानसरोवर झील का आकार सूर्य की तरह है जबकि रक्षताल झील चंद्राकार है | रक्षताल झील का व्यवहार हमेशा उथल पुथल वाला होता है जबकि किसी भी मौसम मे मानसरोवर झील हमेशा शांत रहती है | ये दोनो झील एक दूसरे के बहुत करीब हैं | यह मान्यता है की रक्षताल झील के किनारे रावण ने भगवान शिव की आराधना की थी |

पर्वतारोहियों के अनुभव
कर्नल विलसन, जो की एक पर्वतारोही हैं अपने कैलाश पर्वत की चढ़ाई के प्रयास के अनुभव को बताते हुए कहते है, “जैसे ही मैने पर्वत की चोटी पर पहुँचने का आसान रास्ता ढूँढा, अचानक भारी बर्फ़बारी होने लगी जिसने चढ़ाई को असंभव बना दिया |”
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कैलाश पर्वत की चढ़ाई की कोशिश का एक और अनुभव आपको अस्चर्यचकित कर देगा | एक रूसी पर्वतारोही सरगई किस्तियकोव ने अपना अनुभव लिखा है की जब वह पर्वत की घाटी मे पहुँचा तब उसका हृदय तेज़ी से धड़कने लगा | उसे यह महसूस हुआ की वह उसे इस पवित्र पर्वत पर नहीं होना चाहिए और तुरंत वापस चले जाना चाहिए | जैसे ही वह वापस जाने को हुआ, उसे पुनः सबकुछ ठीक लगने लगा |


कैलाश पर्वत का धार्मिक महत्तव
कैलाश पर्वत कई धर्मो की मान्यताओं के अनुसार एक बहुत ही पवित्र स्थान है | हिंदू धर्म के अनुसार यह स्थान भगवान शिव का निवास स्थान है जबकि बौद्ध धर्म में यह मान्यता है कि यहां भगवान बुद्ध का निवास स्थान है। जैन धर्म के अनुवायियों की मानें तो यहां उनके धर्म के रचयिता भगवान ऋषभ को कैलाश पर्वत पर ज्ञान तथा मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
भू वैज्ञानिकों के अनुसार कैलाश पर्वत 6 और पर्वतों के बीच में स्थित है जो कि कमल के फूल की तरह प्रतीत होते हैं। कैलाश पर्वत से चारों दिशाओं में चार नदियों, सिंधु, ब्रहम्पु़त्र, करनाली और सतलुज का उद्गम स्थान है जो मानसरोवर झील तथा रक्षताल झील से निकलती हैं। ये चारों नदियां ऐशिया की प्रमुख नदियां हैं। एक और मान्यता यह है कि कैलाश पर्वत इस धरती का केंद्र बिंदु है जिसे “ एक्सिस मुंडी “ भी कहा जाता है। यह धरती और स्र्वग तथा संसारिक और अध्यात्मिक दुनिया के संबंध को दर्शाता है। पुराणों के अनुसार यहां धरती और स्र्वग का मिलन होता है।

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कैलाश मानसरोवर की परिक्रमा
कैलाश पर्वत रहस्यमयी होने के साथ साथ एक बहुत पवित्र स्थान माना जाता है जिसकी परिक्रमा सदियों से श्रद्धालु करते रहे हैं। इस परिक्रमा से आत्मा की शुद्धी के साथ साथ पुर्नजन्म की मान्यता जुड़ी हुई है। बौद्ध तथा जैन इस परिक्रमा को खोरा का नाम देते हैं। इस पर्वत की एक परिक्रमा जो कि 52 कि मी लंबी होती है, एक जीवन चक्र की परिक्रमा के बराबर होती है जिससे सारे पापों का नाश हो जाता है।
पुराणों के अनुसार कैलाश सुमेरू पर्वत का धरती पर अभिरूप है जो रहस्यमयी शक्तियों का भंडार है। इस पर्वत के आस पास की हवा भी बुढ़ापे की ओर शीघ्र ले जाती है तथा जो लोग इस पर्वत के आस पास आते हैं उनके नाखून तथा बाल 12 घंटे में बढ़ जाते हैं जो कि अमूमन दो सप्ताह में होता है। रूसी शोधकर्ता इस पर्वत को मानव निर्मित पिरामिड मानते हैं जिसे किसी दैविक शक्ति वाले मनुष्य ने बनाया है।
तमाम शोधों और प्रयासों के बावजूद यही माना जाता है कि कोई भी इंसान उस पर्वत के 6638 मी ऊंचे होने के बावजूद कोई पर्वतारोही इस पर विजय प्राप्त नहीं कर पाएगा। लेकिन कुछ बातें, चाहें वह जितनी भी डरावनी हों या जिनका इतिहास कितना भी पुराना क्यूं न हो, उनका रहस्यमयी रहना ही ठीक है।

हमारे देश में, मुसलमान जहाँ भी हैं, वहां की हालत आपको पता है। कश्मीर से लाखों हिन्दुओं को सरेआम निकाल दिया दिया। हज़ारों को मौत के घाट उतार दिया। केरल और पश्चिमी बंगाल में जो आज हो रहा है, वह आने वाले खतरे का संकेत है। यहाँ भी हज़ारों जनपदों में हिन्दुओं के साथ इतना भेदभाव होता है जितना किसी और जनपद में, देश में कहीं पर भी, किसी और धर्म के लोगों से नहीं होता। पर इस सबका हल क्या है? केवल एक! हिन्दुओं को संगठित होना होगा। हमें अपने आपसी बेदभाव और खासकर जातिवाद को खत्म करना होगा। जितना जल्दी हो सकते, उतना बेहतर।
आइये सुनते हैं इस विषय पर डॉ॰ सुब्रमनियन स्वामी क्या कहते हैं:

पाकिस्त्तान में हिन्दुओ की स्थिति दयनीय है. पाकिस्तान में 1947 में कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिंदू थे। अभी इनकी जनसंख्या कुल आबादी का मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई है। पांच वर्ष पूर्व पाकिस्तानी हिन्दुओं का एक जत्था धर्मंयात्रा वीजा पर भारत आया था लेकिन वो वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे फिर उसके बाद एक एक करके कई जत्थे अपनी चल अचल संपत्ति छोड़कर भारत आते गये और शरणार्थी की तरह जीवन गुजारा.. इस वीडियो में देखिये पाकिस्तान में हिन्दुओ की क्या हालत है .. 



पाकिस्तानी हिन्दुओ के लिए मोदी सरकार अब प्रॉपर्टी खरीद सकने व् बैंक अकाउंट खुलवाने जैसे अधिकार देने के बारे में योजना बना रही है अगले पेज पर पढ़ें मोदी सरकार की पूरी योजना


भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे पाकिस्तानी हिन्दुओं को राहत देने के लिए कई कदम उठाए जाने वाले हैं। इनमें भारतीय नागरिक के तौर पर रजिस्ट्रेशन के लिए फीस को भी 15 हजार रुपए से घटाकर 100 रुपए करने का प्रस्ताव है
भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे पाकिस्तानी हिन्दुओं को जल्द ही संपत्ति खरीदने का अधिकार मिलेगा, बल्कि वे बैंक अकाउंट भी खुलवा सकेंगे। वे पैन कार्ड और आधार कार्ड भी बनवा सकेंगे। मोदी सरकार इन लोगों को खास सुविधाएं देने की दिशा में काम कर रही है।



CHENNAI: If one goes by the latest statistics of National Crime Records Bureau (NCRB), every day 93 women are being raped in the country.

According to NCRB data, there is a gradual increase in the number of rapes reported in India - from 24,923 in 2012 to 33,707 in 2013.

Despite of several protests after Nirbhaya incident in New Delhi, the national capital continuous to be the unsafe city in the country. The number of rapes in Delhi has almost doubled from 585 in 2012 to 1,441 in 2013. Delhi is followed by Mumbai (391), Jaipur (192) and Pune (171) among the top unsafe cities in the country.



It is also revealed that Madhya Pradesh has recorded the maximum rapes in 2013 among all other states with 4,335. In April this year, a 14-year-old dalit girl was allegedly gang-raped by five people on a moving bus in Madhya Pradesh.

In another incident in Madhya Pradesh in June this year, a tribal woman was also allegedly gang-raped by ten persons, including her husband after a land dispute.

It is followed by Rajasthan (3285), Maharashtra (3063) and Uttar Pradesh (3050).

A total 923 rape cases were reported in
 Tamil Nadu, which means 3 per day.

The most horrifying fact is that majority of the offenders are known to the victims. NCRB statistics shows that 31,807 (94%) were familiar to the accused, which includes neighbours (10782), other known persons (18171), relatives (2315) and parents (539).

It is also revealed that most victims are aged between 18 and 30 years (15,556) and 14 and 18 years (8,877). Activists argue that legal system is slow to prosecute rape cases, but officials say the number of rape cases have increased because of the awareness on the part of the victims, who come forward to lodge complaints.



Singh made the comments in the new documentary India's Daughter, which screened Wednesday night on the BBC. In the 2012 attack, Singh and five other men lured a young woman onto a bus and then gang-raped her, violating her so brutally that she later died from her injuries.
The 2012 Delhi gang rape was a high-profile instance of the brutal sexual attacks that strike fear into Indian women — more recently, a woman in Rohtak was violently gang-raped and beaten to death by eight men. In a 2011 study, nearly one in four Indian men surveyed admitted to committing rape — by far the highest of any country included in the sample.
Sexual assault has become a flashpoint in a much deeper political dispute over the ways in which Indian culture is changing as the country becomes more urban and less traditional. A sort of culture war has emerged. One aspect of that war: sexual assault has at times become a weapon used to police Indian women's adherence to traditional social rules and, by extension, society's adherence to traditional values. That has come with disturbingly institutionalized victim-blaming that, along with impunity for perpetrators, allows a culture of sexual assault to flourish.

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